रिवाइज कोर्स मुरली 11-06-1970

                                        

निराकार ज्योतिर्बिन्दु स्वरूप परमपिता शिवपरमात्मा इस धरती पर अवतरित होकर ज्ञान और योग से धर्म की स्थापन कर रहे हैं।

परम शिक्षक शिवपरमात्मा के द्वारा बताई गई इस ज्ञान मुरली को आत्मिक स्थिति में पढ़ना चाहिए।

आत्मिक स्थिति में आने के लिए किये जाने वाले संकल्प :

1. मैं आत्मा शान्त स्वरूप हूँ, शिवबाबा मेरे परमपिता हैं।

2. मैं ईश्वरीय विद्यार्थि हूँ, बाबा मेरे टीचर हैं।

3. बाबा मेरे सद्गुरु हैं, मैं मास्टर सद्गुरु हूँ।

4. शिव परमात्मा मेरे जीवन साथी हैं, मैं शिव परमात्मा की जीवनसाथी हूँ।

5. सर्व संबंधों को बाबा से जोड़कर उस संबंध के कर्त्तव्य को ब्राह्मण जीवन में आचरण में लाने से आत्मिक स्थिति सहज हो जाती है।

आत्मिक स्थिति में, हर एक मुरली में, "बाबा मुरली मुझ से ही कह रहे हैं", ऐसे भाव से पढ़ना चाहिए।

विश्वपति बनने की सामग्री”

आज सतगुरुवार के दिवस किस लिए विशेष बुलाया है? आज कुमारियों का कौन-सा दिवस है? (समाप्ति समारोह) समाप्ति समारोह नहीं है लेकिन आज का सतगुरूवार का दिन विश्वपति बनने की शुभ अविनाशी दशा बैठने का दिवस है। समझा। तो आज बापदादा विश्वपति बनाने की क्या सामग्री लाये होंगे? जब कोई समारोह होता है तो उसमें सामग्री भी होती है। तो आज विश्वपति बनाने के समारोह में विशेष क्या सामग्री लाये हैं? ताज, तख़्त और तिलक। फिर इन तीनों को धारण करने की हिम्मत है? ताज को धारण करने लिए तख़्त पर विराज़मान होने के लिए और तिलक को धारण करने के लिए क्या करना पड़ेगा? अगर यह धारण करने की हिम्मत है तो उसके लिए क्या करना पड़ेगा?

एक तो त्याग, दूसरा तपस्या और सेवा। तिलक को धारण करने के लिए तपस्या और ताज को धारण करने के लिए त्याग और तख़्त पर विराज़मान होने के लिए जितनी सेवा करेंगे उतना अब भी तख़्त नशीन और भविष्य में भी तख़्त नशीन बनेंगे। इन तीनों बातों से ही तीनों चीज़ें धारण कर सकेंगे। अगर एक भी धारणा कम है तो फिर विश्वपति नहीं बन सकेंगे। समझा। तो इन तीनों गुणों की अपने में सम्पूर्ण धारणा की है? तीनों में से एक भी छूटे नहीं तब शूरवीर का जो नाम दिया है वह कार्य कर सकेंगी? तीनों की प्रतिज्ञा की है? त्याग किसका करेंगे? सभी से बड़े से बड़ा त्याग क्या है? अब सर्विस पर उपस्थित हो रही हो तो उसके लिए मुख्य यही धारणा रखना है कि मैं पन का त्याग।

मैंने किया, मैं यह जानती हूँ, मैं यह कर सकती हूँ, यह मैं पन का जो अभिमान है उसका त्याग करना है। मैं के बजाय बापदादा की सुनाई हुई ज्ञान की बातों को वर्णन करो। मैं यह जानती हूँ। नहीं। बापदादा द्वारा यह जाना है। ज्ञान में चलने के बाद जो स्व अभिमान आ जाता हैं, उसका भी त्याग। जब इतनी त्याग की वृत्ति और दृष्टि होगी तब सदैव स्मृति में बाप और दादा रहेगा और मुख पर भी यही बोल रहेंगे। समझा। तब विश्वपति बन सकेंगी। विश्व की सर्विस कर सकेंगी। अपनी धारणा को अविनाशी बनाने के लिए वा सदा कायम रखने के लिए दो बातें याद रखनी है। कौन सी? विशेष कन्याओं के लिए हैं।

एक तो सभी बातों में सिम्पल रहना और अपने को सैम्पल समझना। जैसे आप सैम्पल बन दिखायेंगे वैसे ही अनेक आत्माएं भी यह सौदा करने के लिए पात्र बनेंगी। इसलिए यह दो बातें सदैव याद रखो। अपने को ऐसा श्रेष्ठ सैम्पल बनाया है? जो अच्छा सैम्पल निकलता है उनको फिर छाप भी लगाई जाती है। आप कौन सी छाप लगाकर जाएँगी, जो कभी मिटे नहीं? शिवशक्तियां और ब्रह्माकुमारियाँ। साकार में दो निमित्त बनी हुई बड़ी अथॉरिटी यह छाप लगा रही हैं। इसलिए यह याद रखना कि मिटेंगे लेकिन कब हटेंगे नहीं। संस्कारों में, चाहे सर्विस में, चाहे सम्बन्ध में सर्व बातों में अपने को मिटायेंगे लेकिन हटेंगे नहीं। हटना कमजोरी का काम है।

 शिवशक्तियाँ अपने को मिटाती हैं न कि हटती हैं। तो यह बातें याद रखनी हैं। फिर इस ग्रुप का प्रैक्टिकल पेपर कब होगा? अभी का रिजल्ट फाइनल का नहीं हैं। अभी तो पेपर देने के लिए जा रहे हो। फिर उसकी रिजल्ट देखेंगे। यह ग्रुप आगे कदम बढ़ा सकता है। बापदादा ऐसी उम्मीद रखते हैं। इसलिए अब ऐसा समझो कि जो भी कर्मबन्धन हैं उसको बहुत जल्दी काटकर फिर मधुबन में सम्पूर्ण समर्पण का समारोह मनाने आना है। इस लक्ष्य से जाना है। फिर इस ग्रुप से कितनों का सम्पूर्ण समर्पण का समारोह होता है। आज तो महाबली बनने की बातें सुनाई हैं। फिर महाबली चढ़ने के लिए आयेंगे तो बाप-दादा खूब सजायेंगे।सजाकर फिर स्वाहा करना होता है।

 जितना बाप-दादा के स्नेही उतना फिर सहयोगी भी बनना है। सहयोगी तब बनेंगे जब अपने में सर्वशक्तियों को धारण करेंगे। फिर स्वाहा होना सहज होगा। जो भी कोई शक्ति की कमी हो तो वह आज के दिन ही अपने में भरकर जाना। कोई भी कमी साथ ले न जाना। अभी सिर्फ हिसाब-किताब चुक्तू करने जाते हो। सर्वशक्तियां अपने में भरकर जायेंगे तब चुक्तू कर सकेंगे ना। तो अब फाइनल पेपर के नंबर्स तो जब प्रैक्टिकल कर दिखायेंगे तब निकलेंगे।

मुरली पढ़ने के बाद परम शिक्षक सद्गुरु शिवबाबा से बताई गई विधि मनन चिंतन है।

मनन चिंतन करने की विधि, शिवबाबा चार मुरलीयों में बतायें हैं।

01-02-1979

23-12-1987

10-01-1988

07-04-1981

मनन शक्ति ही दिव्य बुद्धि की खुरक है।

हर वाक्य का रहस्य क्या है?, हर वाक्य को किस समय में?, किस विधि के द्वारा कार्य में प्रयोग करना है?, और हर वाक्य को दूसरे आत्माओं के प्रति सेवा में किस विधि से कार्य में लाना है?, ऐसे चार प्रकार से हर वाक्य को मनन करना है।

ज्ञान के मनन चिंतन के द्वारा समर्थ संकल्प, समर्थ स्थिति और शक्तिशाली स्मृति में रह सकते हैं।

ज्ञान की स्मृति (मनन चिंतन) द्वारा हमको ज्ञान दाता शिवबाबा की स्मृति स्वतः रहती है।

मनन चिन्तन करने के लिए उपयोगी संकल्प के लिए "समर्थ संकल्पों का खजाना" उपर के शिर्षकों में देखा जा सकता है।

मनन चिंतन मुरलीयों के लिए इस लिंक को स्पर्श करें।

सम्पूर्ण संपन्न भव!