रिवाइज कोर्स मुरली 18-06-1974  

निराकार ज्योतिर्बिन्दु स्वरूप परमपिता शिवपरमात्मा इस धरती पर अवतरित होकर ज्ञान और योग से धर्म की स्थापन कर रहे हैं।

परम शिक्षक शिवपरमात्मा के द्वारा बताई गई इस ज्ञान मुरली को आत्मिक स्थिति में पढ़ना चाहिए।

आत्मिक स्थिति में आने के लिए किये जाने वाले संकल्प :

1. मैं आत्मा शान्त स्वरूप हूँ, शिवबाबा मेरे परमपिता हैं।

2. मैं ईश्वरीय विद्यार्थि हूँ, बाबा मेरे टीचर हैं।

3. बाबा मेरे सद्गुरु हैं, मैं मास्टर सद्गुरु हूँ।

4. शिव परमात्मा मेरे जीवन साथी हैं, मैं शिव परमात्मा की जीवनसाथी हूँ।

5. सर्व संबंधों को बाबा से जोड़कर उस संबंध के कर्त्तव्य को ब्राह्मण जीवन में आचरण में लाने से आत्मिक स्थिति सहज हो जाती है।

आत्मिक स्थिति में, हर एक मुरली में, "बाबा मुरली मुझ से ही कह रहे हैं", ऐसे भाव से पढ़ना चाहिए।

लाइट हाउस और माइट हाउस बन, नई दुनिया के मेकर बनो!

सर्व-आत्माओं को सर्व-शक्तियों से सन्तुष्ट करने वाले, नई दुनिया के मेकर व विश्व-कल्याणी पिता शिव बोले :-

अपने को क्या लाइट हाउस और माइट हाउस समझ कर चलते हो? सिर्फ लाइट और माइट समझ कर नहीं लेकिन लाइट हाउस और माइट हाउस। अर्थात् लाइट और माइट देने वाले दाता, हाउस तब बन सकेंगे जब उनके अपने पास इतना स्टॉक जमा हो। अगर स्वयं सदा लाइट स्वरूप नहीं बन सकते व लाइट स्वरूप में सदा स्थित नहीं हो सकते, तो वह अन्य आत्माओं को लाइट हाउस बन, लाइट नहीं दे सकते। जो स्वयं ही मास्टर सर्वशक्तिमान् होते हुए, अपने प्रति भी सर्वशक्तियों को यूज  नहीं कर सकते तो वे माइट हाउस बन, अन्य आत्माओं को सर्वशक्तियों का दान कैसे कर सकते हैं? अब स्वयं से पूछो कि मैं क्या लाइट और माइट हाउस बना हूँ?

कोई भी आत्मा अगर कोई भी शक्ति प्राप्त करने की इच्छा रखते हुए आपके सामने आये तो क्या उस आत्मा को वह शक्ति दे सकते हो? अगर सहन करने की इच्छा अथवा निर्णय करने की शक्ति की इच्छा रख कर कोई आये और उसे समाने की शक्ति या परखने की शक्ति का दान दे दो, लेकिन उस समय उस आत्मा को जो सहन शक्ति के दान की ज़रूरत है यदि वह उसे नहीं दे सकते, तो क्या ऐसी आत्मा को महादानी, वरदानी या विश्व-कल्याणी कह सकते हैं? अगर स्वयं में ही किसी एक शक्ति की कमी होगी, तो दूसरों को सर्वशक्तिवन् बाप के वर्से का अधिकारी वा मास्टर सर्वशक्तिमान् कैसे बना सकेंगे? सूर्यवंशी हैं-सर्वशक्तिमान् और चन्द्रवंशी हैं-शक्तिवान्।

अगर एक शक्ति की भी कमी है, तो सर्वशक्तिमान् के बजाय, शक्तिवान् कहलाये जावेंगे अर्थात् वे सूर्यवंश के राज्यभाग के अधिकारी नहीं बन सकते। सर्वशक्तिमान् ही सर्वगुण सम्पन्न, सोलह कला सम्पूर्ण बनने के अधिकारी बनते हैं। कम शक्तिवान् कल्याणी बन सकते हैं, लेकिन विश्व-कल्याणी नहीं बन सकते। अगर किसी आत्मा को समाने की शक्ति चाहिये और आप उसे विस्तार करने की शक्ति दे दो वा और अन्य सब शक्तियाँ दे दो, लेकिन जो उसको चाहिये वह न दे सको, तो क्या वह आत्मा तृप्त होगी? क्या आपको विश्व-कल्याणी मानेंगी?

जैसे किसको पानी की प्यास हो और आप उसे छत्तीस प्रकार के भोजन दे दो, लेकिन पानी का प्यासा क्या छत्तीस प्रकार के भोजन से सन्तुष्ट होगा वा आपके प्रति शुक्रिया मानेगा? पानी के बदले चाहे आप उसे हीरा दे दो, परन्तु उस समय उस आत्मा के लिए पानी की एक बूंद की कीमत अनेक हीरों से ज्यादा है, ऐसे ही अगर अपने पास सर्वशक्तियों का स्टॉक जमा नहीं होगा तो, सर्व-आत्माओं को सन्तुष्ट करने वाली सन्तुष्टमणियाँ नहीं बन सकेंगे, वा सर्व-आत्मायें आपको जी-दाता, सर्व-शक्ति दाता नहीं मानेंगी। अगर विश्व की सर्व- आत्माओं द्वारा विश्व-कल्याणी माननीय नहीं बनेंगे, तो माननीय के बिना पूज्यनीय भी नहीं बन सकेंगे।

सन्तुष्ट मणि बनने के बिना बाप-दादा के मस्तक की मणियाँ नहीं बन सकते हो। क्या ऐसे महीनता की चैकिंग करते हो वा अब तक मुख्य-मुख्य बातों में भी चैकिंग करना मुश्किल अनुभव होता है? अगर चैकिंग करना नहीं आता वा सोचते हुए भी निजी संस्कार नहीं बनता, तो उसका एक टाइटल कम हो जाता है-वह कौन-सा? एक-एक सब्जेक्ट  का एक-एक टाइटल है। चार सब्जेक्ट्स के चार टाइटल कौन-से हैं? पहला-ज्ञान के सब्जेक्ट् में प्रवीण आत्मा का टाइटल है मास्टर ज्ञान सागर वा नॉलेजफुल, वा स्वदर्शन चक्रधारी कहो तो भी एक ही बात है। दूसरा-याद की यात्रा में जो यथार्थ युक्ति-युक्त, योग-युक्त है उनका टाइटल है-पॉवरफुल।

क्योंकि याद से सर्वशक्तियों का वरदान प्राप्त होता है। तो याद की यात्रा में जो यथार्थ रीति से चलने वाला है उनका टाइटल है-पॉवरफुल। तीसरा सब्जेक्ट है-दिव्य गुण। ऐसे दिव्य-गुण मूर्त को कौन-सा टाइटल देंगे? उनका टाइटल है-दिव्य-गुणों की खुशबुएं फैलाने वाला - इसेन्सफुल (सार-युक्त)। जैसे इसेन्स (सार) यदि कहीं भी दूर रखा होगा, तो भी वह अपना प्रभाव डालेगा अर्थात् खुशबू फैलावेगा, तो क्या ऐसे ही दिव्य-गुणों की खुशबू की इसेन्स वाली रूहानी सेन्स के इसेन्सफुल हैं? अब अपने में चैक  करो कि क्या चारों ही सब्जेक्ट्स के चार टाइटल धारण करने के योग्य बने हो? अगर चैकिंग करनी नहीं आती, तो फिर कौन-सा टाइटल कट होगा?

कई तो कहते हैं कि चैकिंग करना चाहते हैं, लेकिन धक्के से गाड़ी चलती है। निजी संस्कार सदा काल नहीं चलते। इसमें कौन-सी कमी कहेंगे? नॉलेज तो है कि यह करना चाहिये। त्रिकालदर्शी-पने की नॉलेज तो मिल गयी है ना? क्या नॉलेजफुल  हो? अभी अगर किसी भी कमजोरी वश हो जाते हो, उस कमजोरी को जानते भी हो, उसे वर्णन भी करते हो और उसके मिटाने को प्वाइन्ट्स भी वर्णन करते हो, लेकिन वर्णन करते हुए भी, जो चाहते हो, वह कर नहीं पाते हो। नॉलेज तो बुद्धि में फुल है, लेकिन जितना नॉलेजफुल, क्या उतना ही साथ-साथ पॉवरफुल  भी हो? यह बैलेन्स ठीक न होने के कारण, जानते हुए भी कर नहीं पाते हो।

 तो जो चैकिंग नहीं कर पाते, उन आत्माओं का, बैलेन्स में रहने वाले ब्लिसफुल का टाइटल कट हो जाता है, वह न् स्वयं को ब्लिस दे सकते हैं, न बाप से ब्लिस ले सकते हैं और न अन्य आत्माओं को ही दे सकते है। क्योंकि चैक करने के निजी संस्कार नहीं बनते, तो चैकिंग नहीं होती और चेन्ज भी नहीं होते। जो चैकर नहीं बन सकते, वह मेकर भी नहीं बन सकते, वह न स्वयं के, न अन्य आत्माओं के और न विश्व के ही। नई दुनिया बनाने वाले और नया जीवन बनाने वाले इस महिमा के अधिकारी नहीं बन सकते। इसलिए अब चैकर बनो।

जैसे अमृतवेले की रूहरूहान की मुख्य बात को सभी ने मिलकर, दृढ़ संकल्प के आधार पर, स्वयं को और अन्य साथियों को सफलतामूर्त बनाया है। इसी प्रकार, इस बात को भी मुख्य जान और एक दो के सहयोगी बन सफलतामूर्त बनो। तब ही सर्व कार्य सम्पन्न होंगे। वर्तमान समय मैजारिटी में जो विशेष दो कमजोरियाँ दिखाई दे रही हैं, उसकी समाप्ति वा उन दो कमजोरियों में सफलतामूर्त तब बनेंगे, जब इस बात को सफल बनावेंगे। वह दो कमजोरियाँ हैं - आलस्य और अलबेलापन। इसको मिटाने का साधन चैकर बनना है। 99 पुरूषार्थियों में किसी न किसी रूप में आलस्य और अलबेलापन कहीं अंश रूप में है और कहीं वंश रूप में है। महारथियों में अंश रूप कौन-सा है?

घोड़ेसवार में वंश रूप कौन-सा है? क्या उसको जानते हो? अंश रूप है कि मेरी नेचर व मेरे संस्कार। मेरी भावना नहीं है, लेकिन बोल व नैन चैन हैं, रेखायें हैं, लेकिन रूप बने हुए नहीं हैं-यह है अंश-मात्र। सम्पूर्ण विजयी बनने में अलबेलापन अथवा रॉयल  रूप का आलस्य बाधक है। घोड़ेसवार वा सेकेण्ड डिवीज़न में पास होने वाली आत्माओं में वंश रूप में किस रूप में हैं? उनका रूप हैं, हर बात में, यह बोल उन्हों का ट्रेडमार्क है, हर बात में कॉमनशब्द हैं। अलबेले और आलस्यपन के शब्द कौन-से हैं? वह सदैव अपने को सेफ रखने की प्वाइन्ट्स देने में वा बातें बनाने में बड़े प्रवीण होते हैं। स्वयं को निर्दोष और दूसरों पर दोष रखने में फूर्त होते हैं। लायर्सहोते हैं।

लेकिन लॉफुल नहीं होते। जैसे लायर्स झूठे केस को सच्चा सिद्ध कर निर्दोषी को दोषी बना देते हैं। वैसे ही सेकेण्ड डिवीज़न वाले कभी भी अपने दोष को जानते हुए भी, स्वयं को दोषी प्रसिद्ध नहीं करेंगे। इसलिये लायर्स हैं, लेकिन लॉफुल नहीं हैं। ऐसे की ट्रेडमार्क बोल सदैव यही निकलेंगे कि मैंने यह किया क्या? मैंने यह बोला क्या? मेरे मन में तो कुछ था ही नहीं? निकल गया, तो फिर क्या हुआ? हो गया, तो फिर क्या हुआ? ‘ठीक कर दूंगा।’ ‘फिर क्या’ की ट्रेडमार्क के बोल होंगे। जैसे सृष्टि-चक्र के समझाने में फिर-क्या, फिर-क्या कहते सारी स्टोरी बतला देते हो ना?

सतयुग के बाद फिर क्या हुआ, त्रेता आया, फिर-क्या हुआ, द्वापर आया... फिर क्या शब्द में सारे चक्र की कहानी सुनाते हो। वैसे वह लायर्स आत्मायें फिर-क्या शब्द के आधार पर दूसरों के ऊपर सारा चक्र चलाये देती हैं, स्वयं को साक्षी बना देते हैं वा न्यारा बना देते हैं वा छुड़ा देते हैं। ‘फिर-क्या’ शब्द से अर्थात् इस एक संकल्प से अलबेलेपन वा रॉयल-आलस्य का वंश अन्दर ही अन्दर बढ़ता जाता है और ऐसी आत्मा को पॉवरफुल बनाने के बजाय निर्बल बनाते जाते हैं। यह है सेकेण्ड डिवीजन अर्थात् घोड़ेसवार आत्माओं के अन्दर अलबेलापन और आलस्य वंश-रूप में, इस अंश वा वंश को समाप्त करने के लिये, चैकर बनना अति आवश्यक है।

8 दिन में, एक दिन चैकर बनते हो, 7 दिन अलबेले रहते हो, तो संस्कार 7 दिन के बनेंगे वा एक दिन के? इसलिए अलर्ट बनने के बजाय इजीऔर लेज़ी बनते हो। ऐसे की रिज़ल्ट क्या होगी? क्या ऐसे विश्व कल्याणकारी, सर्व- शक्तियों के महादानी-वरदानी बन सकते हैं? इसलिए अब इन दो बातों को अंश- रूप में वा वंश-रूप में, जिस रूप में भी है, उसको अभी से मिटावेंगे, तब ही बहुत समय विजयी बनने के संस्कारों के अनुसार विजय माला के मणके बन सकेंगे। अच्छा!

ऐसे सुनने और स्वरूप बनने वाले, संकल्प को एक सेकेण्ड में साकार रूप में लाने वाले, सर्व आत्माओं को लाइट हाउस व माइट हाउस बन सर्वशक्तियों से संतुष्ट करने वाले, सन्तुष्ट मणियाँ, मस्तक मणियाँ, सदा स्वयं पर और हर संकल्प पर चैकर बनने वाले नई दुनिया के मेकर और विश्व कल्याणी आत्माओं को परमात्मा और सर्वश्रेष्ठ आत्मा बाप-दादा की याद प्यार, गुडनाइट और नमस्ते।

मुरली पढ़ने के बाद परम शिक्षक सद्गुरु शिवबाबा से बताई गई विधि मनन चिंतन है।

मनन चिंतन करने की विधि, शिवबाबा चार मुरलीयों में बतायें हैं।

01-02-1979

23-12-1987

10-01-1988

07-04-1981

मनन शक्ति ही दिव्य बुद्धि की खुरक है।

हर वाक्य का रहस्य क्या है?, हर वाक्य को किस समय में?, किस विधि के द्वारा कार्य में प्रयोग करना है?, और हर वाक्य को दूसरे आत्माओं के प्रति सेवा में किस विधि से कार्य में लाना है?, ऐसे चार प्रकार से हर वाक्य को मनन करना है।

ज्ञान के मनन चिंतन के द्वारा समर्थ संकल्प, समर्थ स्थिति और शक्तिशाली स्मृति में रह सकते हैं।

ज्ञान की स्मृति (मनन चिंतन) द्वारा हमको ज्ञान दाता शिवबाबा की स्मृति स्वतः रहती है।

मनन चिन्तन करने के लिए उपयोगी संकल्प के लिए "समर्थ संकल्पों का खजाना" उपर के शिर्षकों में देखा जा सकता है।

मनन चिंतन मुरलीयों के लिए इस लिंक को स्पर्श करें।

सदा सुखी भव!