रिवाइज कोर्स मुरली 25-01-1976  

निराकार ज्योतिर्बिन्दु स्वरूप परमपिता शिवपरमात्मा इस धरती पर अवतरित होकर ज्ञान और योग से धर्म की स्थापन कर रहे हैं।

परम शिक्षक शिवपरमात्मा के द्वारा बताई गई इस ज्ञान मुरली को आत्मिक स्थिति में पढ़ना चाहिए।

आत्मिक स्थिति में आने के लिए किये जाने वाले संकल्प :

1. मैं आत्मा शान्त स्वरूप हूँ, शिवबाबा मेरे परमपिता हैं।

2. मैं ईश्वरीय विद्यार्थि हूँ, बाबा मेरे टीचर हैं।

3. बाबा मेरे सद्गुरु हैं, मैं मास्टर सद्गुरु हूँ।

4. शिव परमात्मा मेरे जीवन साथी हैं, मैं शिव परमात्मा की जीवनसाथी हूँ।

5. सर्व संबंधों को बाबा से जोड़कर उस संबंध के कर्त्तव्य को ब्राह्मण जीवन में आचरण में लाने से आत्मिक स्थिति सहज हो जाती है।

आत्मिक स्थिति में, हर एक मुरली में, "बाबा मुरली मुझ से ही कह रहे हैं", ऐसे भाव से पढ़ना चाहिए।

डबल लाइट स्वरूप बनो

निरन्तर योगी की स्थिति तक पहुँचने का मार्ग बताने वाले तथा डबल लाइट स्वरूप बनाने वाले शिव बाबा बोले –

भक्तिमार्ग में लक्ष्मी को महादानी दिखाते हैं तो महादानी की निशानी कौनसी दिखाते हैं? (लक्ष्मी का हाथ खुला, देने के रूप में दिखाया जाता है) सम्पत्ति झलकती रहती है। यह शक्तियों का यादगार है। लक्ष्मी अर्थात् सम्पत्ति की देवी। वह स्थूल सम्पत्ति नहीं, नॉलेज की सम्पत्ति, शक्तियों रूपी सम्पत्ति की देवी अर्थात् देने वाली। तो जो यह चित्र बनाया है, ऐसी सम्पत्ति की देवी बनना है। चाहे नॉलेज देवे, चाहे शक्तियाँ देवे। ऐसा जो यादगार चित्र है, चेतन में अपने को ऐसा अनुभव करते हो? एक सेकेण्ड भी कोई आपके सामने आवे तो भी दृष्टि से ऐसा अनुभव करे कि मैंने कुछ पाया। तब कहेंगे देने वाली देवी। अब चाहिये यह सर्विस, तब विश्व का कल्याण होगा।

इतनी सभी आत्माओं को देना तो ज़रूर है, तो देने का स्वरूप सूक्ष्म और अति शक्तिशाली। समय कम और प्राप्ति ऊँची। ऐसे देने वाली शक्तियाँ या देवियाँ कितनी तैयार हुई हैं? ऐसी कितनी देवियाँ होंगी? इसी प्रमाण यादगार में भी नम्बर हैं। कोई हर समय देने वाली, कोई कभी-कभी देने वाली, कोई किन्हीं-किन्हीं को देने वाली, कोई सभी को देने वाली, कोई कहती है चॉन्स मिले तो करें, फील्ड होगी या सहयोग मिलेगा तो करेंगे। तो उनका यादगार क्या है? उनकी यादगार में भी तिथि-तारीख फिक्स होती है। जो सदा के करने वाले होते हैं, उनकी पूजा भी सदा होती है। जो समय व सहयोग के आधार से चॉन्स लेते हैं, उनके यादगार की डेट फिक्स होती है।

कई देवियों के वस्त्र बदलने की, हर कर्म की पूजा होती है। इससे सिद्ध है कि उन्होंने हर कर्म करते, सारा समय दान किया है, जिसको ‘महादानी’ कहेंगे। इसलिये उनकी महान् पूजा, महान् यादगार है। एक होती हैं जो सदा साथियों के साथ स्नेह निभा के चलती हैं, दूसरे साथ होते भी स्नेह का साथ नहीं निभाते। उनके यादगार में भी सारा समय पुजारियों का साथ नहीं मिलता। जो यहाँ स्वार्थ के लिए आवेंगे, यादगार में भी स्पष्ट होता है कि यह किसका यादगार है। यह भी राज़ है। अभी ऐसा बनना है। सदा साथियों के साथ स्नेह का साथ निभाना है, सिर्फ समय पर नहीं, सदा के लिये साथ निभाना है।

 स्वार्थ से नहीं, काम निकालने के लिये नहीं बल्कि स्नेह से और सदा के लिये साथ निभाना है। अच्छा!

मुरली पढ़ने के बाद परम शिक्षक सद्गुरु शिवबाबा से बताई गई विधि मनन चिंतन है।

मनन चिंतन करने की विधि, शिवबाबा चार मुरलीयों में बतायें हैं।

01-02-1979

23-12-1987

10-01-1988

07-04-1981

मनन शक्ति ही दिव्य बुद्धि की खुरक है।

हर वाक्य का रहस्य क्या है?, हर वाक्य को किस समय में?, किस विधि के द्वारा कार्य में प्रयोग करना है?, और हर वाक्य को दूसरे आत्माओं के प्रति सेवा में किस विधि से कार्य में लाना है?, ऐसे चार प्रकार से हर वाक्य को मनन करना है।

ज्ञान के मनन चिंतन के द्वारा समर्थ संकल्प, समर्थ स्थिति और शक्तिशाली स्मृति में रह सकते हैं।

ज्ञान की स्मृति (मनन चिंतन) द्वारा हमको ज्ञान दाता शिवबाबा की स्मृति स्वतः रहती है।

मनन चिन्तन करने के लिए उपयोगी संकल्प के लिए "समर्थ संकल्पों का खजाना" उपर के शिर्षकों में देखा जा सकता है।

मनन चिंतन मुरलीयों के लिए इस लिंक को स्पर्श करें।

सदा निर्विग्न भव!