रिवाइज कोर्स मुरली 30-11-2012  

निराकार ज्योतिर्बिन्दु स्वरूप परमपिता शिवपरमात्मा इस धरती पर अवतरित होकर ज्ञान और योग से धर्म की स्थापन कर रहे हैं।

परम शिक्षक शिवपरमात्मा के द्वारा बताई गई इस ज्ञान मुरली को आत्मिक स्थिति में पढ़ना चाहिए।

आत्मिक स्थिति में आने के लिए किये जाने वाले संकल्प :

1. मैं आत्मा शान्त स्वरूप हूँ, शिवबाबा मेरे परमपिता हैं।

2. मैं ईश्वरीय विद्यार्थि हूँ, बाबा मेरे टीचर हैं।

3. बाबा मेरे सद्गुरु हैं, मैं मास्टर सद्गुरु हूँ।

4. शिव परमात्मा मेरे जीवन साथी हैं, मैं शिव परमात्मा की जीवनसाथी हूँ।

5. सर्व संबंधों को बाबा से जोड़कर उस संबंध के कर्त्तव्य को ब्राह्मण जीवन में आचरण में लाने से आत्मिक स्थिति सहज हो जाती है।

आत्मिक स्थिति में, हर एक मुरली में, "बाबा मुरली मुझ से ही कह रहे हैं", ऐसे भाव से पढ़ना चाहिए।

"संतुष्टमणियों का भाग्य, दिल का गीत पाना था सो पा लिया"

आज बच्चों के याद और प्यार ने बापदादा को इस साकारी दुनिया में अपनी आकर्षण से बुला लिया। बापदादा भी बच्चों को साकारी दुनिया में साकार रूप में देख रहे हैं। चारों ओर के बच्चे भी बाप को देख रहे हैं और बाप भी साकार स्वरूप में देख रहे हैं। और दिल में चारों ओर के बच्चों प्रति वाह! बच्चे, कल्प-कल्प के पात्र बच्चों को देख खुश हो रहे हैं। हर एक बच्चे के भाग्य और प्राप्ति को देख मिलन मना रहे हैं। दिल ही दिल में हर बच्चे के भाग्य को देख हर्षित हो रहे हैं। हर बच्चे के चेहरे में चमकता हुआ भाग्य दिखाई दे रहा है। मस्तक में लाइट की प्राप्ति चमक रही है। हाथों में ज्ञान का भण्डार दिखाई दे रहा है। दिल में दिलाराम दिखाई दे रहा है।

पांव में कदम में पदम दिखाई दे रहा है। ऐसा भाग्य देख हर एक का चेहरा चमक से चमक रहा है। सभी चारों ओर के बच्चे सन्तुष्ट स्वरूप दिखाई दे रहे हैं। ऐसे चेहरे चमकते हुए देख अन्य आत्मायें भी सोचती हैं इन्हों को क्या मिला है। तो आप क्या जवाब देंगे? जो पाना था वो पा लिया। सब सन्तुष्ट मणियों के रूप में चमक रहे हैं। ऐसी अपनी मूर्त को आप भी देख रहे हो ना! बापदादा भी ऐसी सन्तुष्टमणि आत्माओं को देख क्या गीत गाते हैं। वाह मेरे सन्तुष्ट आत्मायें वाह! तो आज सिर्फ बच्चों का दिल का उल्हना पूर्ण करने के लिए आये हैं। आप सभी का भी उल्हना तो पूरा हुआ ना। आगे जैसे ड्रामा निमित्त बनायेगा ऐसे मिलते रहेंगे।  आज इतना ही ड्रामा में मिलन है।

सभी बच्चों ने बहुत अच्छी रथ की सेवा की है। बापदादा सभी सेवा के निमित्त आत्माओं को विशेष मुबारक दे रहे हैं। अभी सिर्फ बच्चों का मिलने का उल्हना पूरा करने आये हैं। तो सभी ठीक हैं। ठीक हैं सभी हाथ उठाओ। रथ की भी सेवा करने वालों को दिल की मुबारक है। चाहे कहाँ भी रथ को रहना पड़ा लेकिन बापदादा ने देखा गुजरात भी कम नहीं है। कहाँ हैं गुजरात के? तो बापदादा और साथ में हमारे निमित्त बने हुए पाण्डव निर्वैर बच्चे ने भी बहुत साथ दिया। आओ। (सरला दीदी को) बहुत अच्छा किया। सभी दादियों को निमित्त बन सम्भालने के लिए आपको और आपके साथियों को बहुत-बहुत मुबारक हो।

(दादी जानकी के लिए) अच्छा सुना, सब ठीक हो ही जाना है।

दादी जानकी से:- सभी ने मिल के अच्छा पार्ट बजाया है। दादी की आवाज भी आ रही है। आज सिर्फ मिलने के लिए ही आये हैं। अभी आते रहेंगे और मिलते रहेंगे। अच्छा।

तीनों बड़े भाईयों से:- अभी बापदादा कमाल देखने चाहते हैं, कौन सी कमाल देखने चाहते हैं? परिवार की आप तीनों में बहुत उम्मीदें हैं। अब बापदादा भी समझते हैं एक विचार कर अलग-अलग विचार तो होता ही है लेकिन विचार को मिलाना, वह अपने हाथ में होता है। तो बापदादा भी आप निमित्त बने हुए पाण्डवों में यह कमाल देखने चाहते हैं, विचार भिन्न-भिन्न होते हैं लेकिन मिलाना भी होता है। तो अभी तीनों यही कमाल दिखाना तीन नहीं लेकिन तीनों एक हैं, बाकी तो सब अच्छे हैं, निमित्त होके चला रहे हैं। अच्छा।

देश विदेश के भाई बहिनों को बहुत-बहुत मुबारक हो, जो दोनों ही निमित्त दादियों की सम्भाल बहुत अच्छी की है, उसकी विशेष मुबारक है। और सभी तरफ के भाई बहिनों को विशेष दिल की याद प्यार दे रहे हैं और सदा दिल में समाये हुए हैं इसलिए सदा याद में रहना और एक दो को याद दिलाते रहना। अच्छा।

आज तो सिर्फ जो सभी को संकल्प था, मिलना है, मिलना है, मिलना है। वह शरीर के हिसाब से पूरा हुआ। अब आगे जो ड्रामा में होगा मिलते रहेंगे।बापदादा बच्चों से कभी भी दूर नहीं रह सकते। जैसे बच्चे बाप से दूर नहीं रह सकते तो बाप भी बच्चों से दूर नहीं रह सकता। बापदादा सभी बच्चों को देख खुश है, मुबारक भी देते हैं कि अभी हर एक समझे कि मैं इस बेहद के कार्य के लिए सिर्फ स्वयं के लिए नहीं, स्वयं के साथ सेवा के भी निमित्त हूँ। अब ऐसी कमाल दिखाओ, दुनिया में हलचल और हलचल को अचल बनाने वाले निमित्त आप हो। वह अपना कार्य नहीं छोड़ते तो आप भी अपने को निमित्त समझ वह हलचल आप अचल, दोनों साथ-साथ पार्ट बजाओ। अच्छा। आज सिर्फ मिलने आये थे।

महाराष्ट्र, मुम्बई, आँध्रप्रदेश के भाई बहिनों की सेवा का टर्न है:- सभी हाथ हिला रहे हैं। हर एक जोन को निमित्त बनने का पार्ट मिलता है। और बापदादा ने देखा कि हर एक ने पार्ट बजाया भी है और बजायेंगे भी।

चार विंग्स, एज्युकेशन, धार्मिक, साइंस-इंजीनियर, कल्चरल और कैड ग्रुप भी आया है। जो भी विंग्स वाले हैं, वह हर एक विंग एक दो से आगे हैं और अटेंशन दे कार्य को आगे बढ़ा भी रहे हैं, उसकी मुबारक हो, मुबारक हो। चारों ओर के बच्चों को अपना-अपना कार्य करने की मुबारक भी हो और आगे के लिए हर एक विंग या हर एक जोन आगे से आगे बढ़ते रहेंगे, यह बापदादा की मुबारक है।

डबल विदेशी जो भी आये हैं, वह खड़े हो जाओ। बापदादा अभी डबल विदेशी नहीं कहते डबल पुरुषार्थी। क्योंकि डबल पुरुषार्थी अभी भी चारों ओर बढ़ रहे हैं, छोटे छोटे स्थानों में भी अटेंशन दे रहे हैं इसलिए सेवा की भी मुबारक है और डबल पुरुषार्थ की भी मुबारक है। अभी डबल विदेशी नहीं कहो डबल तीव्र पुरुषार्थी कहो। ठीक है। डबल पुरुषार्थी, डबल माना तीव्र पुरुषार्थी। तो बापदादा को याद है कि डबल पुरुषार्थी कहाँ-कहाँ से आये हैं, लेकिन सब से दूर कौन है?

 सबसे दूर कौन है? अमेरिका वाले। वह भी इस दुनिया के हैं। लेकिन बापदादा कहाँ से आये हैं? बच्चों ने कहा और बाप हाजिर। चाहे शरीर का कुछ भी हो लेकिन बच्चे, बच्चे हैं। बाप सदा जी हाजिर हो जाते हैं। अच्छा, चारों ओर के बहुत-बहुत अपना अच्छा पार्ट बजाने वाले ऐसे बाप ने कहा, बच्चों ने किया, ऐसे बच्चे सदा बाप के दिल में रहते हैं। तो चारों ओर के ऐसे बच्चों को पदम गुणा यादप्यार। अच्छा।

(जानकी दादी को सिर में चोट लगी है) यह तो होता रहता है, इसकी कोई बात नहीं है। और ही सुन्दर हो गई हो। (दादी जानकी सिर ढके हुए है) दादी दादी कहती हो ना, तो दादी का रूप भी तो देखो। यह ठीक है? (हंसा बहन, प्रवीणा बहन से) थकती तो नहीं हो। अच्छा है। (हंसा बहन से) सेवा अच्छी कर रही हो। सेवा जो भी करते हैं ना आप लोगों को देख के उन्हों को भी उमंग आता है इसीलिए उन्हों की मुबारक मिलती रहती है, जो निमित्त बनते हैं। डाक्टर्स को भी याद भेजना।

(ऐसे दोनों दादियों के साथ ही क्यों हुआ) यह उत्तर ड्रामा देगा। ड्रामा। अभी इसके आगे तो कोई नहीं बोल सकता। ड्रामा, ड्रामा ही है। (नीलू बहन उल्हना दे रही हैं) जो बोलना हो, बोलो।

अच्छा, सब बिन्दु रूप में स्थित हो जाओ।

मुरली पढ़ने के बाद परम शिक्षक सद्गुरु शिवबाबा से बताई गई विधि मनन चिंतन है।

मनन चिंतन करने की विधि, शिवबाबा चार मुरलीयों में बतायें हैं।

01-02-1979

23-12-1987

10-01-1988

07-04-1981

मनन शक्ति ही दिव्य बुद्धि की खुरक है।

हर वाक्य का रहस्य क्या है?, हर वाक्य को किस समय में?, किस विधि के द्वारा कार्य में प्रयोग करना है?, और हर वाक्य को दूसरे आत्माओं के प्रति सेवा में किस विधि से कार्य में लाना है?, ऐसे चार प्रकार से हर वाक्य को मनन करना है।

ज्ञान के मनन चिंतन के द्वारा समर्थ संकल्प, समर्थ स्थिति और शक्तिशाली स्मृति में रह सकते हैं।

ज्ञान की स्मृति (मनन चिंतन) द्वारा हमको ज्ञान दाता शिवबाबा की स्मृति स्वतः रहती है।

मनन चिन्तन करने के लिए उपयोगी संकल्प के लिए "समर्थ संकल्पों का खजाना" उपर के शिर्षकों में देखा जा सकता है।

मनन चिंतन मुरलीयों के लिए इस लिंक को स्पर्श करें।

मास्टर भगवान भव!