रिवाइज कोर्स मुरली 15-11-2013
निराकार ज्योतिर्बिन्दु स्वरूप परमपिता शिवपरमात्मा इस धरती पर अवतरित होकर ज्ञान और योग से धर्म की स्थापन कर रहे हैं।
परम शिक्षक शिवपरमात्मा के द्वारा बताई गई इस ज्ञान मुरली को आत्मिक स्थिति में पढ़ना चाहिए।
आत्मिक स्थिति में आने के लिए किये जाने वाले संकल्प :
1. मैं आत्मा शान्त स्वरूप हूँ, शिवबाबा मेरे परमपिता हैं।
2. मैं ईश्वरीय विद्यार्थि हूँ, बाबा मेरे टीचर हैं।
3. बाबा मेरे सद्गुरु हैं, मैं मास्टर सद्गुरु हूँ।
4. शिव परमात्मा मेरे जीवन साथी हैं, मैं शिव परमात्मा की जीवनसाथी हूँ।
5. सर्व संबंधों को बाबा से जोड़कर उस संबंध के कर्त्तव्य को ब्राह्मण जीवन में आचरण में लाने से आत्मिक स्थिति सहज हो जाती है।
आत्मिक स्थिति में, हर एक मुरली में, "बाबा मुरली मुझ से ही कह रहे हैं", ऐसे भाव से पढ़ना चाहिए।
“कोई भी बात आये उसे बाप को देकर आप मुस्कराते रहो”
सभी खुशनुमा बच्चों को देख बापदादा बहुत-बहुत खुश हो रहे हैं। वाह मेरे खुशनसीब, खुशनुमा बच्चे वाह। सभी के दिल में बापदादा समाया हुआ है। हर बच्चे के चेहरे से स्नेह की खुश्बू आ रही है। सदा हर बच्चा खुश आबाद रहने वाली आत्मायें है। बापदादा एक-एक बच्चे की मुस्कराती हुई सूरत को देख खुश है। सदा ऐसे ही मुस्कराते खुशी में नाचते बढ़ते चलो, बढाते चलो। हर बच्चे के मस्तक में बापदादा चमकते हुए सितारे को देख रहे हैं। अच्छा। आज़ सर्व बच्चों की याद की आकर्षण बापदादा को पहुंच रही है। सदा खुश है और सदा खुश रहेंगे। कोई भी बात आये, बात बाप को दे दो और आप मुस्कराते रहो। अच्छा।
आज शरीर के कारण सभी बच्चों को आहूवान से बापदादा सबसे मिलन मना रहे हैं। अच्छा। आज शरीर के कारण छोटी सी मुलाकात हो रही है। चारों और के बच्चे सुन भी रहे हैँ और नयनों से मिलन भी मना रहे हैं। बापदादा बच्चों के मिलन को देख कितने खुश होते हैं, वह हर एक बच्चा जान सकते हैं। अच्छा। आज का ग्रुप बिशेष जो आये हैं, हाथ उठाओ, (कर्नाटक जोन के सेवाधारियों सहित 15 हजार भाई बहिनें आये हैं) जो अभी आये हैं। सभी को मुबारक है, मुबारक है, मुबारक है। अच्छा। बापदादा चारों और के बच्चे जो चात्रक हो सुन रहे हैं देख रहै हैं उन सभी को बहुत बहुत याद प्यार दे रहे हैं। आप सभी को तो सन्मुख यादप्यार मिल रहा है।
लेकिन चारों और के बच्चे बहुत स्नेह पूर्वक आश लगाकर बैठते हैँ। उन आशा रखने वाले बच्चों को जैसे बच्चे देख रहे हैं वैसे बापदादा भी देख रहे हैं। सभी से बापदादा नयनों का मिलन मना रहे है। अच्छा। निमित्त बने हुए चाहे पाण्डव हैँ , चाहे शक्तियां है, सभी सहयोगी और स्नेही बन अपना अपना कार्य कर रहे हैँ और करते रहेंगे।
(मोहिनी बहन , मुन्नी बहन 7 दिन के लिए दुबई जा रहे है) बनाया है तो जाना ही है। (आपकी मदद तो चाहिए) मदद देने के लिए बंधा हुआ है। (दादी जानकी जी ने विदेश के बहिनों की याद दी)
जिन्होंने भी यादप्यार भेजा है उन सबको बापदादा दष्टि देते हुए यादप्यार दे रहें हैं।
मुरली पढ़ने के बाद परम शिक्षक सद्गुरु शिवबाबा से बताई गई विधि मनन चिंतन है।
मनन चिंतन करने की विधि, शिवबाबा चार मुरलीयों में बतायें हैं।
01-02-1979
23-12-1987
10-01-1988
07-04-1981
मनन शक्ति ही दिव्य बुद्धि की खुरक है।
हर वाक्य का रहस्य क्या है?, हर वाक्य को किस समय में?, किस विधि के द्वारा कार्य में प्रयोग करना है?, और हर वाक्य को दूसरे आत्माओं के प्रति सेवा में किस विधि से कार्य में लाना है?, ऐसे चार प्रकार से हर वाक्य को मनन करना है।
ज्ञान के मनन चिंतन के द्वारा समर्थ संकल्प, समर्थ स्थिति और शक्तिशाली स्मृति में रह सकते हैं।
ज्ञान की स्मृति (मनन चिंतन) द्वारा हमको ज्ञान दाता शिवबाबा की स्मृति स्वतः रहती है।
मनन चिन्तन करने के लिए उपयोगी संकल्प के लिए "समर्थ संकल्पों का खजाना" उपर के शिर्षकों में देखा जा सकता है।
मनन चिंतन मुरलीयों के लिए इस लिंक को स्पर्श करें।