रिवाइज कोर्स मुरली 15-12-2013
निराकार ज्योतिर्बिन्दु स्वरूप परमपिता शिवपरमात्मा इस धरती पर अवतरित होकर ज्ञान और योग से धर्म की स्थापन कर रहे हैं।
परम शिक्षक शिवपरमात्मा के द्वारा बताई गई इस ज्ञान मुरली को आत्मिक स्थिति में पढ़ना चाहिए।
आत्मिक स्थिति में आने के लिए किये जाने वाले संकल्प :
1. मैं आत्मा शान्त स्वरूप हूँ, शिवबाबा मेरे परमपिता हैं।
2. मैं ईश्वरीय विद्यार्थि हूँ, बाबा मेरे टीचर हैं।
3. बाबा मेरे सद्गुरु हैं, मैं मास्टर सद्गुरु हूँ।
4. शिव परमात्मा मेरे जीवन साथी हैं, मैं शिव परमात्मा की जीवनसाथी हूँ।
5. सर्व संबंधों को बाबा से जोड़कर उस संबंध के कर्त्तव्य को ब्राह्मण जीवन में आचरण में लाने से आत्मिक स्थिति सहज हो जाती है।
आत्मिक स्थिति में, हर एक मुरली में, "बाबा मुरली मुझ से ही कह रहे हैं", ऐसे भाव से पढ़ना चाहिए।
प्राणप्यारे अव्यक्त मूर्त मात पिता बापदादा के अति लाडले, सदा बापदादा के प्यार में समाये हुए देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार- आप सभी आज विशेष बापदादा का आह्वान करने निमित्त अपने-अपने स्थानों पर चात्रक बन साकार में अव्यक्त मिलन मनाने की आश लगाकर बैठे होंगे। लेकिन ड्रामा की भावी, बापदादा समय प्रति समय हम बच्चों की स्थिति को अचल अडोल बनाने और अव्यक्त वतनवासी बन अव्यक्त रूप से मिलन मनाने का विशेष इशारा देते आ रहे हैं तो उसी प्रमाण आज हम सब अनुभव कर रहे हैं। दादी गुल्लार का स्वास्थ्य ठीक होते भी काफी कमज़ोरी महसूस कर रही थी, फिर भी बहुत हिम्मत करके सभा के बीच में पधारी और बापदादा के आह्वान का गीत भी बजा, लेकिन थोड़े समय में दादी ने उस आलमाइटी को स्वयं में धारण करने की असमर्थी महसूस की, तो दादी को स्टेज से कमरे में लेकर गये।
फिर हम सभी बापदादा के अवतरण का पिछला वीडियो देखते रहे। जो आप डायरेक्ट देखने, सुनने वालों ने भी देखा होगा। सभी दादियाँ और मुख्य भाई स्टेज पर योग कराते रहे। गुजरात के भाई बहिनों की सेवा का टर्न था, देश विदेश से करीब 20-21 हजार भाई बहिनें शान्तिवन में पहुंचे हुए थे। दोनों हॉल फुल थे। सभी बहुत एकाग्रचित हो, पावरफुल वायुमण्डल में बापदादा के अव्यक्त महावाक्य वीडियो द्वारा सुन रहे थे। थोड़ी देर के बाद फिर से सन्देश आया कि दादी जी सभा में आ रही हैं। दादी जी फिर से जब सभा में पधारी तो सारा हाल तालियों से गूंजने लगा। सभी खुशी में झूमने लगे। फिर दादी ने बापदादा को भोग स्वीकार कराया और बापदादा सभा के बीच आ गये और बहुत प्यार से हाथ लहराते सभी को वरदानी दृष्टि दी। उसके बाद मधुर महावाक्य उच्चारण किये।
"सदा खुशनुमा रहने वाले खुशकिस्मत बच्चों को बहुत-बहुत-बहुत-बहुत यादप्यार। सदा खुश रहना और खूब खुशी बांटना। एक एक को बापदादा विशेष प्यार दे रहे हैं और सदा सर्व के प्यारे देहभान से न्यारे बाप को दिल में समाते हर कदम उठाना। देश चाहे विदेश सबके, एक एक बच्चे को बापदादा का यादप्यार स्वीकार हो। सर्व के साथ गुजरात निवासियों को भी सारे विश्व की आत्माओं के साथ यादप्यार।"
मुरली पढ़ने के बाद परम शिक्षक सद्गुरु शिवबाबा से बताई गई विधि मनन चिंतन है।
मनन चिंतन करने की विधि, शिवबाबा चार मुरलीयों में बतायें हैं।
01-02-1979
23-12-1987
10-01-1988
07-04-1981
मनन शक्ति ही दिव्य बुद्धि की खुरक है।
हर वाक्य का रहस्य क्या है?, हर वाक्य को किस समय में?, किस विधि के द्वारा कार्य में प्रयोग करना है?, और हर वाक्य को दूसरे आत्माओं के प्रति सेवा में किस विधि से कार्य में लाना है?, ऐसे चार प्रकार से हर वाक्य को मनन करना है।
ज्ञान के मनन चिंतन के द्वारा समर्थ संकल्प, समर्थ स्थिति और शक्तिशाली स्मृति में रह सकते हैं।
ज्ञान की स्मृति (मनन चिंतन) द्वारा हमको ज्ञान दाता शिवबाबा की स्मृति स्वतः रहती है।
मनन चिन्तन करने के लिए उपयोगी संकल्प के लिए "समर्थ संकल्पों का खजाना" उपर के शिर्षकों में देखा जा सकता है।
मनन चिंतन मुरलीयों के लिए इस लिंक को स्पर्श करें।